साँझ सवेरे हरी हरी बोल

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन विष्णु भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हरी बोल हरी बोल हरी हरी बोल,

हरी बोल हरी बोल हरी हरी बोल,

साँझ सवेरे हरी हरी बोल,

साँझ सवेरे हरी हरी बोल....

एक प्रभु के अनेक नाम,

प्रेम से बोलो राधेश्याम,

एक प्रभु के अनेक नाम,

प्रेम से बोलो राधेश्याम,

हरी बोल हरी बोल हरी हरी बोल,

हरी बोल हरी बोल हरी हरी बोल,

साँझ सवेरे हरी हरी बोल,

साँझ सवेरे हरी हरी बोल.....

हरी नाम में सब भूल जाओ,

निसदिन पल क्षण हरी गुण गाओ,

हरी नाम में सब भूल जाओ,

निसदिन पल क्षण हरी गुण गाओ,

हरी बोल हरी बोल हरी हरी बोल,

हरी बोल हरी बोल हरी हरी बोल,

साँझ सवेरे हरी हरी बोल,

साँझ सवेरे हरी हरी बोल.....

हरी सुमिरन में ध्यान लगाओ,

हरी चरणों में शीश झुकाओ,

हरी सुमिरन में ध्यान लगाओ,

हरी चरणों में शीश झुकाओ,

हरी बोल हरी बोल हरी हरी बोल,

हरी बोल हरी बोल हरी हरी बोल,

साँझ सवेरे हरी हरी बोल,

साँझ सवेरे हरी हरी बोल.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।