हे गोविंद राखो शरण

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हे गोविंद हे गोपाल, अब तो जीवन हारे,

हे गोविंद राखो शरण, अब तो जीवन हारो,

हे गोविंद हे गोपाल, अब तो जीवन हारे,

हे गोविंद राखो शरण, अब तो जीवन हारो....

नीर पीबन हेतु गयाऊ सिंधु के किनारे

नीर पीबन हेतु गयाऊ सिंधु के किनारे

सिंधु बीच बसत ग्रह चरण गाही पचरे,

हे गोविंद हे गोपाल, अब तो जीवन हारे,

हे गोविंद राखो शरण, अब तो जीवन हारो.....

चार प्रहार यौढ़ भयाओ लयाई गायाओ मज़धहरे,

चार प्रहार यौढ़ भयाओ लयाई गायाओ मज़धहरे,

नाक कान डुबान लागे, कृष्णा को पुकारे,

हे गोविंद हे गोपाल, अब तो जीवन हारे,

हे गोविंद राखो शरण, अब तो जीवन हारो.....

द्वारिका में शब्द गायाओ शोर भयाओ भरे,

द्वारिका में शब्द गायाओ शोर भयाओ भरे,

शंख चकरा गाड़ा पद्मा गरुड़ लयाई सिधारे,

हे गोविंद हे गोपाल, अब तो जीवन हारे,

हे गोविंद राखो शरण, अब तो जीवन हारो......

“सुर” कहे श्याअं सुनो शरण हैं तिहरे,

“सुर” कहे श्याअं सुनो शरण हैं तिहरे,

अबकी बार पर करो नंद के दुलारे,

हे गोविंद हे गोपाल, अब तो जीवन हारे,

हे गोविंद राखो शरण, अब तो जीवन हारो......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।