सजा दो घर को कलियों से बृज में श्याम आए हैं

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सजा दो घर को कलियों से बृज में श्याम आए हैं,

बृज में श्याम आए हैं, मेरे घनश्याम आए हैं,

लगे कुटिया भी दुल्हन सी मेरे घनश्याम आए हैं,

सजा दो घर को कलियों से.....

पखारो इनके चरणों को बहाकर प्रेम की गंगा,

निहारो इनके नैनो को जगी है प्रीत की आशा,

जगी है प्रीत की आशा जगी है प्रीत की आशा,

बिछा दो राह में पलकें मेरे घनश्याम आए हैं,

लगे कुटिया भी दुल्हन सी मेरे घनश्याम आए हैं,

सजा दो घर को कलियों से.....

तेरी एक झलक पाने को जगत सारा ही है पागल,

आएगा जग का रखवाला खुशी में दिल हुआ घायल,

खुशी में दिल हुआ घायल,

जलाओ दीप घर-घर में मेरे घनश्याम आए हैं,

लगे कुटिया भी दुल्हन सी मेरे घनश्याम आए हैं,

सजा दो घर को कलियों से.....

तेरी आहट से है वाफीक़ तेरे चेहरे की है दरकार,

बिना देखे ही कह देंगे लो आ गए हैं मेरे सरकार,

लो आ गए हे मेरे सरकार,

बहारो फूल बरसा दो मेरे घनश्याम आए हैं,

लगे कुटिया भी दुल्हन सी मेरे घनश्याम आए हैं,

सजा दो घर को कलियों से.....

आस है सबके ही दिल में मेरे नंदलाल आएंगे,

हमारे मोह माया के यह बंधन को छोड़ आएंगे,

यह बंधन को छोड़ आएंगे,

हैं दासी शर्मा की आशा मेरे नंदलाल आएंगे,

लगे कुटिया भी दुल्हन सी मेरे घनश्याम आए हैं,

सजा दो घर को कलियों से.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।