मेरे गुरुदेव मिलेंगे सत्संग में

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे गुरुदेव मिलेंगे सत्संग में,

मिलेंगे सत्संग में, मिलेंगे कीर्तन में,

मेरे गुरुदेव मिलेंगे सत्संग में....

घी की ज्योत जले है मंदिर में,

मन की ज्योत जले है सत्संग में,

मेरे गुरुदेव मिलेंगे सत्संग में....

खुशबू का फूल खिले हैं बगियन में,

भक्ति का फूल खिला है सत्संग में,

मेरे गुरुदेव मिलेंगे सत्संग में....

कपड़े का मेल धुले है साबुन से,

मन का मेल धुले है सत्संग में,

मेरे गुरुदेव मिलेंगे सत्संग में....

घर का ताला खुला है चाबी से,

मन का ताला खुला है सत्संग में,

मेरे गुरुदेव मिलेंगे सत्संग में....

काट की नाव चले है पानी में,

मन की नाव चले हैं सत्संग में,

मेरे गुरुदेव मिलेंगे सत्संग में....

घर के लोग मिले हैं बहना घर में,

प्यारी प्यारी सखियां मिलेंगी सत्संग में,

मेरे गुरुदेव मिलेंगे सत्संग में....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।