पैसे की यह दुनिया है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन विविध भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पैसे की यह दुनिया है और पैसे की यह माया है,

यहाँ कोई नहीं अपना है और कोई ना बेगाना है.....

माता जिसने जन्म दिया वह भी भूल जाती है,

बेटा यह नालायक है और गाली सुनाती है,

पिता कहे घर में मेरे ना तेरा गुजारा है,

कोई नहीं अपना है.....

भैया भाभी बोल रहे संग हमारे ना गुजारा है,

कुछ ना काम आता है बनके घूमता आवारा है,

एके में ना निभय भैया और दूजे में बेगाना है,

कोई नहीं अपना है.....

नारी का यह साथ देखो कुछ दिन का यह मेला है,

जब तक यह पैसा है वह कहती पति मेरा है,

काया माया साथ ना दे वह करती किनारा है,

कोई नहीं अपना है.....

कोई नहीं यहां अपना झूठा जग का यह नाता है,

कुछ ना ले जाएगा चोरी करके जो लाता है,

मुट्ठी बांधे आया था और खाली हाथ जाना है,

कोई नहीं अपना है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।