मैं तो हारावाले महाराज की दिन रात पूजा करूं

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॥ पावन पाठ ॥

मैं तो हारावाले महाराज की दिन-रात पूजा करूं,

तेरे दर पे मिले ठंडी छा, मैं दिन-रात पूजा करूं....

जो भी भूला तेरे दर पे आए,

दर्शन तेरे वो आ करके पाए,

तेरे दर्शन पाके सारी दुनिया भुला के,

सारे जग में उचि बड़ी शान मैं दिन-रात पूजा करूं,

मैं तो हारावाले महाराज की दिन-रात पूजा करूं....

तू है दाता और मैं हूं भिखारी,

तेरे चरणों का मैं हूं पुजारी,

तेरी महिमा मैं गांऊ तुझ पे वारी वारी जाऊं,

सारे जग में उचि बड़ी शान मैं दिन-रात पूजा करूं,

मैं तो हारावाले महाराज की दिन-रात पूजा करूं....

‘आरती’ तेरी भक्ति उतारे,

हर दुखिया तुझको पुकारे,

यहां कोई नहीं मित झूठी जग की है प्रीत,

इक सच्चा है दाता तेरा नाम मैं दिन-रात पूजा करूं,

मैं तो हारावाले महाराज की दिन-रात पूजा करूं....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।