डम डम वजे गुरा दा डमरु

पारंपरिक
अन्य गुरु वाणी गुरुदेव भजन guru-vani
॥ पावन पाठ ॥

डम डम वजे गुरा दा डमरु....

नाम तेरे दी चढ़ गई मस्ती,

भूल गई सानू अपनी हस्ती,

मस्ती दे विच तन मन रंगना,

अपनी भूला के हसती,

डम डम वजे गुरा दा डमरु....

सबना दे दुख हरदा जावे,

सबदी झोली भरदा जावे,

तुसी रहमत वाला दातया,

हथ मेरे सिर उते रखया,

डम डम वजे गुरा दा डमरु....

गल्ल विच है हारा दि माला,

सुंदर सोहना रूप निराला,

मस्ती दे विच तन मन रंगना,

अपनी भूला के हसती,

डम डम वजे गुरा दा डमरु....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।