बुद्धा वंदना

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

नमो तस्स भगवतो अरहतो,

सम्मासं बुद्धस,

नमो तस्स भगवतो अरहतो,

सम्मासं बुद्धस,

नमो तस्स भगवतो अरहतो,

सम्मासं बुद्धस....

बुद्धम शरणम गच्छामि,

धम्मम शरणम गच्छामि,

संघम शरणम् गच्छामि।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।