पुकारो दिल से वो दौड़े आयेंगे

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - ओ साहिबा ओ साहिबा

जय बाबोसा... जय बाबोसा...

जय बाबोसा... जय बाबोसा....

पुकारो दिल से, वो दौड़े आयेंगे,

ये एतबार है हमे,

जय बाबोसा... जय बाबोसा...

जय बाबोसा... जय बाबोसा....

सच्चे दिल से जो, लेते है इनका नाम,

बाबोसा रहते है, उनके संग सुबह शाम,

सच्ची लगन मन मे, गर हो दिल में विशवास,

बतलाओ फिर उसकी, कैसे न पुरी हो आस,

जय बाबोसा... जय बाबोसा...

जय बाबोसा... जय बाबोसा....

हम हार जाओ ये, कभी हो नही सकता,

भक्त अगर दुख में, बाबा सो नही सकता,

जैसे सीप में मोती, है दीप संग ज्योति,

बाबोसा की वैसे, हर भक्त संग प्रीति,

जय बाबोसा... जय बाबोसा...

जय बाबोसा... जय बाबोसा....

जो भी बुलाता है, ये दौड़ा आता है,

दिल मे बिठा " दिलबर " ये प्यार लूटता है,

बाबोसा बदल देगा, तेरी किस्मत की ये रेख,

सूरज भी कहता है, तू दिल से बुलाके देख,

जय बाबोसा... जय बाबोसा...

जय बाबोसा... जय बाबोसा....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।