वे मैं नचना तेरे नाल

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

वे मैं नचना तेरे नाल, जग नू नचान वालेया,

तू वी नच लै अज्ज साडे नाल, जग नू नचान वालेया....

नित तू नचावे अज तैनू नाचावंगे,

रुस जाएंगा ओ ते हथ जोड़ के मनावागे,

अज नचके तू करदे नेहाल, जग नू नचान वालेया,

तू वी नच लै अज्ज साडे नाल, जग नू नचान वालेया....

तन वी है रंगना ते मन वी है रंगना,

अज तेरे नाल श्यामा अंग अंग रंगना,

आजा बंसरी वजा तू साडे नाल, जग नू नचान वालेया,

तू वी नच लै अज्ज साडे नाल, जग नू नचान वालेया....

जग दी हुण सानू कोई परवाह नहीं,

तेरे जेहा बेड़ियाँ दा कोई वी मलाह नहीं,

भावे डोब जा भावे कर पार, जग नू नचान वालेया,

तू वी नच लै अज्ज साडे नाल, जग नू नचान वालेया....

अज वी ना नाचेओ ते दस कदो नचेगा,

प्रेमिया दे हाड़ेया तो किना चिर बचेगा,

आना पयेगा हो के दयाल, जग नू नचान वालेया,

तू वी नच लै अज्ज साडे नाल, जग नू नचान वालेया....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।