मैनु अपने दर पे बुला लो हारा वालिया

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मैनु अपने दर पे बुला लो हारा वालिया,

अपने चरनी लाले मेहरा वालिया,

मैनु अपने दर पे बुलाले हारा वालिया,

अपने चरनी लाले मेहरा वालिया....

हर वेले तेनु सिमरा नाम धियोंदा,

चरना च बैठके जीवन सफल बनौन्दा आ,

मेरा बेड़ा पार लगा दे हारा वालिया,

अपने चरनी लाले मेहरा वालिया....

दूरो दूरो संगता तेरे दर ते आउंदिया,

फुल्ल बक्शा तेरे तो अरज लगाउंदिया,

मेरे सुत्ते भाग जगादे हारा वालिया,

अपने चरनी लाले मेहरा वालिया....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।