मोरछड़ी के झाड़े की क्या बात है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्याम थारी मोरछड़ी, श्याम थारी मोरछड़ी,

श्याम थारी मोरछड़ी …………

मोरछड़ी के झाड़े की क्या बात है,

जिसको लग जाए हो जाए बेड़ा पार है,

ओ बेड़ा पार है ओ भव से पार है….

दुखियों के दुख हरति है ये, बिगड़े काम करती है ये,

पाख पाख में श्याम जी का वास है,

पाख पाख में श्याम जी का वास है,

जिसको लग जाए हो जाए बेड़ा पार है,

मोरछड़ी के झाड़े की क्या बात है,

जिसको लग जाए हो जाए बेड़ा पार है……

मोर छड़ी का जादू निराला,

खोले ये बंद किस्मत का ताला,

सब भक्तों का करती ये उधार है,

जिसको लग जाए हो जाए बेड़ा पार है,

मोरछड़ी के झाड़े की क्या बात है,

जिसको लग जाए हो जाए बेड़ा पार है……..

श्याम बहादुर जी ने भी इसके गुण को गाया है,

युगो युगो से महिमा ये अपार है,

युगो युगो से महिमा ये अपार है,

जिसको लग जाए हो जाए बेड़ा पार है,

मोरछड़ी के झाड़े की क्या बात है,

जिसको लग जाए हो जाए बेड़ा पार है……..

श्याम है नईया कामा जी तो मोरछड़ी पतवार है,

मेरे भरोसे पर ही ये संसार है,

मेरे भरोसे पर ही ये संसार है,

जिसको लग जाए हो जाए बेड़ा पार है,

मोरछड़ी के झाड़े की क्या बात है,

जिसको लग जाए हो जाए बेड़ा पार है……

सोनू सांवरा दास तेरा, जींद का रहने वाला रे,

मेरी जिंदगी का तू पालनहार है,

मेरी जिंदगी का तू पालनहार है,

जिसको लग जाए हो जाए बेड़ा पार है,

मोरछड़ी के झाड़े की क्या बात है,

जिसको लग जाए हो जाए बेड़ा पार है……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।