माँ तू ही नज़र आए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मुँह फेर जिधर देखूं, माँ तू ही नज़र आये...

गैरों ने तो ठुकराया, अपने भी बदल गए हैं,

हम साथ चले जिनके, वो दूर निकल गए हैं,

तेरे रहें पे हूँ, तू बक्शे या ठुकराए, माँ तू ही नज़र आये……..

माना के में पापी हूँ, तुझे खबर गुनाहों की,

बस इतनी सज़ा देना मुझे मेरी खताओं की,

तेरे दर पे हो सर मेरा, और सांस निकल जाए,

मुँह फेर जिधर देखूं…….

हम ख़ाक नशीनो की, क्या खूब तमन्ना है,

तेरे नाम से जीना है, तेरे नाम से मरना है,

मरना तो है वो तेरी, चौखट पे जो मर जाए,

मुँह फेर जिधर देखूं…….

सूरज और चनदा का, आँखों में उजाला है,

मस्तक में अग्नि की प्रचंड ज्वाला है,

तेरी नज़रें करम हो तो, तेरे भक्त भी तर जाएं,

मुँह फेर जिधर देखूं……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।