और मंज़िल केदारनाथ हो

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरे हाथ में तेरा हाथ हो,

और मंज़िल केदारनाथ हो,

मेरे हाथ में तेरा हाथ हो,

और मंज़िल केदारनाथ हो……

शिव शून्य है,

शिव पुन्य है,

शिव कर्म है,

शिव धर्म है,

शिव शून्य है,

शिव पुन्य है ,

शिव कर्म है ,

शिव धर्म है……….

जाहा शिव बसे है बर्फ के संग,

मुझे उस नगरी में लेके चल……..

तेरे हाथ में मेरा हाथ हो,

और मंज़िल केदारनाथ हो……..

तेरे हाथ में मेरा हाथ हो,

और मंज़िल केदारनाथ हो…….

शिव अदि है,

शिव अंत है,

शिव मोक्ष है,

शिव प्रेम है……..

शिव अदि है,

शिव अंत है,

शिव मोक्ष है,

शिव प्रेम है…

जहां बादल बसते शिव के संग,

मुझे उस नगरी में लेके चल…….

तेरे हाथ में मेरा हाथ हो,

और मंज़िल केदारनाथ हो………

तेरे हाथ में मेरा हाथ हो,

और मंज़िल केदारनाथ हो………

शिव है दया,

शिव ही क्रिपा…….

शिव है क्षमा,

शिव है धरा……..

शिव है दया,

शिव है क्रिपा………..

शिव है क्षमा,

शिव है धरा……..

जिस दर पे झुकता सब का सर,

मुझे लेकर तू केदार पे चल……

तेरे हाथ में मेरा हाथ हो,

और मंज़िल केदारनाथ हो…………

मेरे हाथ में तेरा हाथ हो,

और मंज़िल केदारनाथ हो……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।