हजारों हैं रूप हज़ारो है नाम

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हजारों हैं रूप हज़ारो है नाम,

समस्त देव लोक जिन्हे पूजते है आन....

हजारों हैं रूप हज़ारो है नाम,

समस्त देव लोक जिन्हे पूजते है आन,

वो मृगछाला वो भस्मधारी,

जिनके शृंगार में गंगा चाँद,

हजारों हैं रूप हज़ारो है नाम...

दशा हो जैसी काल हो जैसा,

मेरा महाकाल सबकी सुन लेता,

दशा हो जैसी काल हो जैसा,

मेरा महाकाल सबकी सुन लेता,

त्रिनेत्र में जिनके संसार बस्ता,

देख के बैठे है इतिहास युगो का,

भव सागर से देें पार लगा,

जग के मूल आधार शिवा,

वो मृगछाला वो भस्मधारी,

जिनके शृंगार में गंगा चाँद,

हजारों हैं रूप हज़ारो है नाम,

वो मृगछाला वो भस्मधारी....

देखा जब संकट में सब को,

आये बन कर शक्ति तब वो,

हर लिया हर कष्ट हर ने,

नष्ट करके पापी जगत को,

त्रिशूल धारी सत्य मंडल,

वो विनाशी वो ही मंगल,

शिव ने बनाया सब कुछ,

शिव समाये सब के अंदर,

हजारो है रूप हज़ारो है नाम ,

वो मृगछाला वो भस्मधारी....

बिस्वनाथ मम नाथ पुरारी ,

त्रिभुवन महिमा विदित तुम्हारी ,

अंत भी तूम हो तूम ही अनादि ,

अनन्त अंश तुम्हरे त्रिपुरारी,

किरण सुहानी हर शयाम सुहानी ,

जिसको हो जाये दर्श रूहानी,

जो हो जाएं शिव के दीवाने,

उसकी हो जाए दुनिया दीवानी,

उसकी हो जाए दुनिया दीवानी,

हजारो है रूप हज़ारो है नाम,

वो मृगछाला वो भस्मधारी…

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।