तेरे आलणे चो पंछी अजाद हो गया

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तेरे आलणे चो पंछी अजाद हो गया

अज पुरे बारा साला दा हिसाब हो गहा

तेरे नाल कीता माए ना कोईअसा वलशल

बारा साल बाद मारी सानु रोटीया दी छल

साभ रोटीया ते दस की खराब हो गया

अज पुरे बारा साला दा हिसाब हो गया

तेरे अालणे चो़..............

बारा साल माए गाईया तेरीया नु चारेया

सानु अाखे लग लोका दे तु मेहणा मारेया

तेरे मेहणेया दा मेहणा ही जवाब हो हया

अज पुरे बारा साला दा हिसाब हो गया

तेरे अालणे चो़...............

हुंदी मावा नु परख पुतरा दे पयार दी

जे मै हुदां तेरा जाया ना तु मेहणा मारदी

साडे नाल गैरा वाला वरताव हो गया

अज पुरे बारा साला दा हिसाब हो गया

तेरे अालणे चो़...............

हुण असा ना तलाईयां बिच मुड अावणा

कलयुग बिच लाल तेरा ही कहावणा

बिटु राही जाके गुफा च अाबाद हो गया

अज पुरे बारा साला दा हिसाब हो गया

तेरे अालणे चो़....................

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।