कोटड़े ले चालो

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॥ पावन पाठ ॥

कोटड़े ले चालो मन्‍ने बाबा के ले चालो,

कोटड़े ले चालो मन्‍ने धणिया के ले चालो,

कोटडा को बाबो अपने आयो नन्दल का बीरा,

आयो सासू रा जाया बाबा के ले चालो रे,

मन्‍ने बाबा के बाबा के ले चालो ॥

उँचा उँचा डूंगर घ़णा ही महलड़ा ॥

ढोला रे घोड़ा रो अपने आयो नन्दल का बीरा

आयो सासू रा जाया बाबा के ले चालो रे

मन्‍ने बाबा के बाबा के ले चालो ॥

सोणा सोणा महल थारा अजर झरोखा ॥

झरोखा में बाबो अपने आयो नन्दल का बीरा

आयो सासू रा जाया बाबा के ले चालो रे

मन्‍ने बाबा के बाबा के ले चालो ॥

अन्ना रे धन्ना रा भरिया रे भंडारा ॥

सुगना बाई को बीरो अपने आयो नन्दल का बीरा

आयो सासू रा जाया बाबा के ले चालो रे

मन्‍ने बाबा के बाबा के ले चालो ॥

पेडी रे पेडी पर देवी रे देवता ॥

माल्या में सुगना रो वीरो आयो नन्दल का बीरा

आयो सासू रा जाया बाबा के ले चालो रे

मन्‍ने बाबा के बाबा के ले चालो ॥

निचला मॅंगरा में बाबो बाग लगायो ॥

मेना दे रो लालो अपने आयो नन्दल का बीरा

आयो सासू रा जाया बाबा के ले चालो रे

मन्‍ने बाबा के बाबा के ले चालो ॥

प्रेम जी पंदोह बाबा कोटड़ा में ध्यावे ॥

कड़ीवाल की नैया पार लगाई सुगना का बीरा

आयो सासू रा जाया बाबा के ले चालो रे

मन्‍ने बाबा के बाबा के ले चालो ॥

" मंजीत सिंह "

पैड प्लेयर=9887203444

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।