मैं बंगलामुखी दे लड़ लगीया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

" मैं सब दर घूम के देख लऐ ,

बंगलामुखी जेहा कोई दरबार मिलीया

मैनू सारे ही गम भूल गये ने जदों बंगलामुखी दा मैनु प्यार मिलीया "

मैं बंगलामुखी दे लड़ लगीया , मेरे तो गम परे रहंदे

मेरी आसा उम्मीदा , दे सदा बूटे हरे रहन्दे.....॥

कदे वी लोड ना पैंदी , मैनु दर- दर तो मंगन दी ॥

मैं - मैं बंगलामुखी दी मंगती हाँ , मेरे पल्ले भरे रहंदे ...॥

मैं बंगलामुखी तो जो मंगया , मेरी झोली विच पाया ऐ ॥

मैं सच आखा जो मन्न दे ने , सदा ही ओ तरऐ रहन्दे ॥

पीला वस्त्र पीला शस्त्र , पीला है भोग माता ॥

पीले बाने पीले बाने , भगत पाके मईया दे चरणी खड़े रहन्दे ...॥

करो फरियाद नी सखियो , किते मेरी माँ ना रूस जावे ॥

जिहना नाल मात रूस जांन्दे , ऊ जिउदे जी मरे रहन्दे ॥

Singer -: Kumar - Sanjeev

Contact -: 098141 - 62145

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।