मुझको देदो एक लाल चाहे बेटा हो जा बेटी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मुझको देदो एक लाल चाहे बेटा हो जा बेटी,

मेरी एक यही है सवाल मैया बेटा हो जा बेटी,

सुनी गोदी सब कुछ सुना सुनी ममता रोये,

तेरे दर की आस लगी है और दूजा कोई,

अब तो सुनलो मेरी पुकार मैया बेटा हो जा बेटी,

मुझको देदो एक लाल चाहे बेटा हो जा बेटी

गाडी बंगला महल दू महले ये मेरे किस काम की,

मैं चाहू लग जाये मुझ पर मोहर तेरे नाम की,

तू अब और ना मुझको ताल मैया बेटा हो जा बेटी,

मुझको देदो एक लाल चाहे बेटा हो जा बेटी

हर आंगन में बच्चे खेले मेरा आंगन खाली,

हम भी तेरे दर पे खड़े है बनके आज सवाली,

मेरी झोली में कुछ तो दाल मैया बेटा हो जा बेटी

मुझको देदो एक लाल चाहे बेटा हो जा बेटी

तेरी महिमा सुनके मैया तेरे दर पे आई,

अरजी हमारी सुन लो मैया कोई न जग में हसाई,

कोई ऐसा करदो कमाल मैया बेटा हो जा बेटी,

मुझको देदो एक लाल चाहे बेटा हो जा बेटी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।