तूँ है बाबा मेरा

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॥ पावन पाठ ॥

तूँ है बाबा मेरा, मैं हूँ सेवक तेरा l

मेरी विगड़ी, बनाना तेरा काम है l

छोड़ दी किश्ती हमने, तेरे नाम पर l

अब किनारे, लगाना तेरा काम है l

तूँ है बाबा मेरा, मैं हूँ ,,,,,,,,,,,,,,,,,

दर तेरे आ गया, दुनियाँ छोड़कर l

क्यों बैठे हो बाबा जी, मुख मोड़ कर l

होगी बदनामी किसकी, तूँ यह सोच ले l

लाज रखनी, न रखनी तेरा काम है l

तूँ है बाबा मेरा, मैं हूँ ,,,,,,,,,,,,,,,,,

तूँ है नाथों का नाथ, तेरे दर की अदा l

अर्ज़ सुन ले बाबा, मेरे दिल की सदा l

मस्त हरदम रहूँ, मस्ती उतरे नहीं l

ऐसा जाम, पिलाना तेरा काम है l

तूँ है बाबा मेरा, मैं हूँ ,,,,,,,,,,,,,,,,,

कैलाश कहता है ख़ाली, नहीं जाऊँगा l

जान अपनी मैं कुर्बान, कर जाऊंगा l

तेरी भोली सूरत ने है घायल किया l

आगे मलहम, लगाना तेरा काम है l

तूँ है बाबा मेरा, मैं हूँ ,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।