प्यारी सूरत जब से देखी मैं तो तेरा हो गया

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज: सांवली सूरत पे मोहन...........

प्यारी सूरत जब से देखी मैं तो तेरा हो गया,

मैं तो तेरा हो गया दादी, मैं तो तेरा हो गया,

प्यारी सूरत जब से देखी, मैं तो तेरा हो गया....

माथे पे रोली का टीका साथ ही बिंदिया सजी,

देख तेरा श्रृंगार ओ दादी, मैं तो तेरा हो गया,

प्यारी सूरत जब से देखी, मैं तो तेरा हो गया....

नाक की नथली है सोणी, होठों पे लाली लगी,

देख तेरी प्यारी सी मुस्कन, मैं तो तेरा हो गया,

प्यारी सूरत जब से देखी, मैं तो तेरा हो गया....

हाथों का चुड़ला है सोणा, साथ में बजूबन्ध बंधी,

देख तेरे दरबार की महिमा, मैं तो तेरा हो गया,

प्यारी सूरत जब से देखी, मैं तो तेरा हो गया....

लाल चुनरिया सिर पे सोहे, साथ में गजरा सजा,

देख तेरा मंदिर ओ दादी, मैं तो तेरा हो गया,

प्यारी सूरत जब से देखी, मैं तो तेरा हो गया....

दादी का दरबार है प्यारा, सारे जग से न्यारा है,

"मधु" निरखती तुझको हरदम, वो तो तेरी हो गई,

प्यारी सूरत जब से देखी मैं तो तेरा हो गया,

मैं तो तेरा हो गया दादी, मैं तो तेरा हो गया,

प्यारी सूरत जब से देखी, मैं तो तेरा हो गया....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।