मार्ग यही सरल

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॥ पावन पाठ ॥

मोक्ष पथ गमन के,

मार्ग यही सरल,

बुद्ध ने जो राह दिखाई,

बटोही उन पर चल,

धर्म समझ कर्म को अपना,

कभी ना करना किसी से छल,

सत कर्मों की पूंजी हो तेरी,

मन में प्रेम भाव अविरल,

बुद्ध ने जो राह दिखाई,

बटोही उन पर चल,

मोक्ष पथ गमन के,

मार्ग यही सरल,

शांत शील चित्त में भर करूणा,

कर दया उन पर,

जो दीन हीन निर्बल,

बुद्ध ने जो राह दिखाई,

बटोही उन पर चल,

मोक्ष पथ गमन के,

मार्ग यही सरल,

राग द्वेष करना कभी ना,

संयम हो तेरा बल,

मानव जीवन जो तुझे मिला है,

रखना सदा इसे निर्मल,

बुद्ध ने जो राह दिखाई,

बटोही उन पर चल,

मोक्ष पथ गमन के,

मार्ग यही सरल,

परम धाम जाना है तुझको,

बुद्ध की राह पर चल,

बुद्धम शरणं गच्छामि,

मार्ग यही सरल,

संघम शरणं गच्छामि,

बुद्ध की राह पर चल,

मोक्ष पथ गमन के,

मार्ग यही सरल।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।