ऐ हे कटे लगाई देर भेरू जी

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॥ पावन पाठ ॥

ऐ हे कटे लगाई देर भेरू जी,

कटे लगाई वो देर थारे हुना मंदिर में खेले डाकनिया....

ऐ हे गयो सिसोदा माय,

भोपा गयो सिसोदा माय,

भेरू मिलग्या में वाता लागिया,

ऐ हे कटे लगाई देर भेरू जी....

ऐ हे गयो रे दामनिया माय,

भोपा गयो रे दामनिया माय,

भेरू मिलग्या रे मोड़ो होवग्यो,

ऐ हे कटे लगाई देर भेरू जी....

ऐ हे गयो नाडोल माय,

भोपा गयो रे नाडोल माय,

माँ आशापुरा मिलगया में वाता लागिया,

माँ जगदम्बा मिलगया रे मोड़ो होवग्यो,

ऐ हे कटे लगाई देर भेरू जी....

ऐ हे गयो रे चित्तोड़ माय,

भोपा गयो रे चित्तोड़ माय,

माँ काली मिलगया रे वाता लागिया,

ऐ हे कटे लगाई देर भेरू जी....

गयो रे गातोड़िया माय,

भोपा गयो गातोड़िया माय,

धर्म राज मिलग्या रे मोड़ो होवग्यो,

ऐ हे कटे लगाई देर भेरू जी....

ऐ हे गयो रे देबारी माय,

भोपा गयो रे देबारी माय,

चामुंडा मिलग्या में वाता लागिया,

ऐ हे कटे लगाई देर भेरू जी....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।