पैदा होती है नारी पति के लिए

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

सीख अनसूया सीता को देने लगी,

पैदा होती है नारी पति के लिए.....

प्रथम नारी तो वह है सुनो जानकी,

सपने में भी पराया पति ना तके,

जो समझती हैं पति को ही विष्णु महेश,

स्वर्ग समझो वही नारी के लिए,

सीख अनुसूया......

मध्यम नारी तो वह है सुनो जानकी,

भाई बेटा समझकर निहारा करें,

धर्म नारी का जग में समझती रहे,

दीप जलता रहे रोशनी के लिए,

सीख अनुसुइया.....

नीच नारी की अब तुम कहानी सुनो,

पति के होते हुए पर पुरुष को तके,

उसकी कीमत है वेश्या से कुछ कम नहीं,

वेद कहते यही नारी के लिए,

सीख अनुसुइया.....

धर्म लाखों करें पर नर्क में पड़े,

भरी जवानी में विधवा व होती रहे,

तुम तो प्यारी हो सीता श्री राम की,

यह कहानी है जग नारियों के लिए,

सीख अनुसुइया.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।