मेरे भीगे नयन रोते हैं मैया तेरे दर्शन को

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरे भीगे नयन रोते हैं मैया तेरे दर्शन को,

मैया तेरे दर्शन को दाती तेरे दर्शन,

मेरे भीगे नयन रोते हैं.....

मैं बागो बागो फिरती हूं,

मेरी मैया नजर नहीं आती है,

डाली को पकड़ रोते हैं मैया तेरे दर्शन को,

मेरे भीगे नयन रोते हैं.....

मैं तालो तालो फिरती हूं,

मेरी मैया नजर नहीं आती है,

साड़ी को पकड़ रोते हैं मैया तेरे दर्शन को,

मेरे भीगे नयन रोते हैं.....

मैं कुआं कुआं फिरती हूं,

मेरी मैया नजर नहीं आती है,

गगरी को पकड़ रोते हैं मैया तेरे दर्शन को,

मेरे भीगे नयन रोते हैं.....

मैं महलों महलों फिरती हूं,

मेरी मैया नजर नहीं आती है,

खिड़की को पकड़ रोते हैं मैया तेरे दर्शन को,

मेरे भीगे नयन रोते हैं.....

मैं मंदिरों मंदिरों फिरती हूं,

मेरी मैया नजर नहीं आती है,

मूरत को पकड़ रोते हैं मैया तेरे दर्शन को,

मेरे भीगे नयन रोते हैं.....

मैं सत्संग सत्संग फिरती हूं,

मेरी मेंया नजर नहीं आती है,

ढोलक को पकड़ रोते हैं मैया तेरे दर्शन को,

मेरे भीगे नयन रोते हैं.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।