शुक् गुजारा तेरा

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॥ पावन पाठ ॥

पाईया तेरे दर तो मैं , रहमतां हजारा ॥

शुक्र गुजारा तेरा , तेरा शुक्र गुजारा ॥

कौडिया दा मूल नई सी , हीरिया दा पै गिया ॥

जदों दा मैं दाता तेरे , चरणा च बैह गिया ॥

गुरु नाम बोल दिया , मन दीया तारा ॥

सुख देवे दुःख देवे , झोली विच पा लवा ॥

दुःखा नू वी दातीया , मैं सुखां नाल ला लवां ॥

जेहडा वेला आवे , आईनो हस के गुजारां ॥

रहमतां नू देख अखां , हस पईया रौंदींया ॥

साडे कोलो दाता , तेरीया सिफता न होंदीया ॥

चंगे वेले सुन लईया , साडीया पुकारा .....॥

दर _ दर रूल दे सां किसे न संभालिया ॥

मेहर कीति सतगुरु चरणां च ला लिया ॥

क्यों न दाता तेरे ऊतो तन मन वारा .......॥

Singer -: Kumar -sanjeev

Contact -: 098141 -62145

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।