ओ मेरे भोले मैं जोडू दोनों हाथ

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ओ मेरे भोले मैं जोडू दोनों हाथ बुढ़ापा दीजो मत ना रे.....

सुसर दियो तो दशरथ जैसा,

ओ मेरे भोले नहीं तो बिल्कुल दीजो टाल,

बुढ़ापा दीजो मत ना रे,

ओ मेरे भोले मैं जोडू दोनों हाथ बुढ़ापा दीजो मत ना रे.....

सास दीजो तो कौशल्या जैसी,

ओ मेरे भोले नहीं तो बिल्कुल दीजो टाल,

बुढ़ापा दीजो मत ना रे,

ओ मेरे भोले मैं जोडू दोनों हाथ बुढ़ापा दीजो मत ना रे.....

देवर दीजो तो लक्ष्मण जैसा,

ओ मेरे भोले नहीं तो बिल्कुल दीजो टाल,

बुढ़ापा दीजो मत ना रे,

ओ मेरे भोले मैं जोडू दोनों हाथ बुढ़ापा दीजो मत ना रे.....

जेठ दीजो तो बलदाऊ जैसा,

ओ मेरे भोले नहीं तो बिल्कुल दीजो टाल,

बुढ़ापा दीजो मत ना रे,

ओ मेरे भोले मैं जोडू दोनों हाथ बुढ़ापा दीजो मत ना रे.....

पति दीजो तो ऐसा दीजो,

ओ मेरे भोले सारी उमर निभावे साथ,

बुढ़ापा दीजो मत ना रे,

ओ मेरे भोले मैं जोडू दोनों हाथ बुढ़ापा दीजो मत ना रे.....

मन मेरा सत्संग में लगाइए,

ओ मेरे भोले जो भजन करूं दिन रात,

बुढ़ापा दीजो मत ना रे,

ओ मेरे भोले मैं जोडू दोनों हाथ बुढ़ापा दीजो मत ना रे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।