भोले नाथ भांग पीनी भूल जावेगा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

खाले बाजरे की रोटी भोलेनाथ के भांग पीनी भूल जावेगा.....

बाजरे की रोटी भोले बड़ी रे कमाल की,

देसी घी डाल मैंने दाल तैयार की,

लस्सी भी लाई भोले साथ के भांग पीनी भूल जावेगा,

खाले बाजरे की रोटी......

बाजरे का आटा राजस्थान से लाई,

मीठा-मीठा गु़ड बाबा यूपी से ले आई,

तू मजे से खाले भोलेनाथ के भांग पीनी भूल जावेगा,

खाले बाजरे की रोटी.....

बाजरे की रोटी खा कर पेट भर जावे,

भांग धतूरा तुझे फिर नहीं भावे,

खाता रहेगा दिन रात के भांग पीनी भूल जावेगा,

खाले बाजरे की रोटी.....

बाजरे की रोटी खाकर ठंड नहीं लागे,

लस्सी पी के बाबा मस्ती में जागे,

तू डमरु बजावे दिन रात के भांग पीनी भूल जावेगा,

खाले बाजरे की रोटी.....

तू भी खाले भोले गौरा को भी खिला ले,

कार्तिक को खिला ले और गणपत को खिला ले,

भगत करें फरियाद के भांग पीनी भूल जावेगा,

खाले बाजरे की रोटी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।