सीता करें विलाप जन्म बेटी को मत दीजो

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

सीता करें विलाप जन्म बेटी को मत दीजो,

हे मेरे दीनानाथ जन्म बेटी को मत दीजो,

सीता करें विलाप जन्म बेटी को मत दीजो.....

पहला हित बाबुल से लगाया,

जाने स्वयंवर दियो रचाए जन्म बेटी को मत दीजो,

सीता करें विलाप जन्म बेटी को मत दीजो.....

दूजा हित मैया से लगाया,

जाने भेज दई ससुराल जन्म बेटी को मत दीजो,

सीता करें विलाप जन्म बेटी को मत दीजो.....

तीजा हित ससुल से लगाया,

जिसने मांग लिए वरदान जन्म बेटी को मत दीजो,

सीता करें विलाप जन्म बेटी को मत दीजो.....

चौथा हित ससुरा से लगाया,

जाने भेज दई बनवास जन्म बेटी को मत दीजो,

सीता करें विलाप जन्म बेटी को मत दीजो.....

पांचवा हित मैंने पति से लगाया,

जाने घर से दई निकाल जन्म बेटी को मत दीजो,

सीता करें विलाप जन्म बेटी को मत दीजो.....

छठवां हित बाल्मीकि से लगाया,

दीया सारा ज्ञान बताएं जन्म बेटी को मत दीजो,

सीता करें विलाप जन्म बेटी को मत दीजो.....

सातवां हित बेटों से लगाया,

बेटो ने दी पहचान जन्म बेटी को मत दीजो,

सीता करें विलाप जन्म बेटी को मत दीजो.....

आठवां हित धरती माता से लगाया,

जाने गोद में लई बैठाए जन्म बेटी को मत दीजो

सीता करें विलाप जन्म बेटी को मत दीजो.....

हे मेरे भाग्य विधाता सुनियो,

नारी को दीजों सम्मान जन्म बेटी को जब दीजो,

सीता करें विलाप जन्म बेटी को मत दीजो.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।