भवन रंगीला मां का

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भवन रंगीला मां का शेर पीला पीला है.....

ब्रह्माणी ने चुनर ओढ़ी ब्रह्मा का मन डोला है,

ऐसे शंकधारी का सिंहासन फूलों वाला है,

भवन रंगीला मां का शेर पीला पीला है.....

लक्ष्मी जी ने चुनर ओढ़ी विष्णु का मन डोला है,

ऐसे चक्र धारी का सिंहासन नागो वाला है,

भवन रंगीला मां का शेर पीला पीला है.....

गोरा जी ने चुनर ओढ़ी भोले का मन डोला है,

ऐसे डमरू धारी का कमंडल पीला पीला है,

भवन रंगीला मां का शेर पीला पीला है.....

सीता जी ने चुनर ओढ़ी रामा का मन डोला है,

ऐसे धनुषधारी का पीतांबर पीला पीला है,

भवन रंगीला मां का शेर पीला पीला है.....

राधा जी ने चुनर ओढ़ी कान्हा का मन डोला है,

ऐसे मुरली वाले का पीतांबर नीला नीला है,

भवन रंगीला मां का शेर पीला पीला है.....

मैया जी ने चुनर ओढ़ी भक्तों का मन डोला है,

ऐसी जग कल्याणी की सवारी पीली पीली है,

भवन रंगीला मां का शेर पीला पीला है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।