नारी है गुण की खान

पारंपरिक
हनुमान जी भजन विविध भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

अरे नारी है गुण की खान कोई जानन वारो जाने,

कोई जानन वारो जाने, कोई मानन वारो जाने,

अरे वह नर है पशु समान जो नारी कदर ना जाने,

अरे नारी है गुण की खान कोई जानन वारो जाने.....

नारी के हनुमान हुए थे लांग समुंदर पार गए थे,

अरे जाने लंका दई जलाए कोई जानने वालों जाने,

नारी है गुण की खान.....

नारी के हरिश्चंद्र हुए थे अपने वचन से नहीं हटे थे,

अरे जो बिक गए बीच बाजार कोई जानने वालों जाने,

नारी है गुण की खान.....

नारी के श्रीराम हुए थे पिता बचन से नहीं हटे थे,

अरे गए 14 बरस बनवास कोई जानने वालों जाने,

नारी है गुण की खान.....

नारी के श्री कृष्ण हुए थे अपने वचन से नहीं हटे थे,

अरे जाने गिरवर लिए उठाए कोई जानने वालों जाने,

नारी है गुण की खान.....

नारी के मोरध्वज हुए थे अपने वचन से नहीं हटे थे,

अरे जिसने आरा दीया चलाएं कोई जानने वालों जाने,

नारी है गुण की खान.....

नारी के नरसी जी हुए थे अपने बचन से नहीं हटे थे,

अरे जिस ने सब कुछ दिया लुटाए कोई जानने वाला जाने,

नारी है गुण की खान.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।