राम नाम वालो झूंझणियो

पारंपरिक
श्री राम गुरु वाणी राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

राम नाम वालो झूंझणियो मेरा, सतगुरु आके बजा दियो,

सतगुरु आके बजा दियो मेरा, धन गुरु आके बजा दियो।।

मनै मेरा सतगुरु पूरा मिलगया, मन भरमि ने घायल कियो,

लागि चोट सबदडा री तन में, मन मस्ताने ने मार दियो,

राम नाम वालो झूंझणियो मेरा, सतगुरु आके बजा दियो।

पहलो नाम नाभ से लीन्यो, कंठ कमल में ठहराय दियो,

कंठ कमल की अगलोड़ी घाटी, बंकनाल में बाड़ दियो,

राम नाम वालो झूंझणियो मेरा, सतगुरु आके बजा दियो।

शुन्य शिखर के रंगमहल में, बादल ज्यूं गरणाय रयो,

झिरमिर झिरमिर अमृत बरसे, इ अमृत ने पीय रह्यो,

राम नाम वालो झूंझणियो मेरा, सतगुरु आके बजा दियो।

तन के ऊपर अखै शुन्य है, बिन सूरज चमकाय रह्यो,

शरण मछँदर जति गोरक्ष बोल्या, आप में आप समाय रयो,

राम नाम वालो झूंझणियो मेरा, सतगुरु आके बजा दियो।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।