आन पड़ा हूं मां

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आन पड़ा हूं ठोकर में मां,

दुनिया का ठुकराया हूं,

नहीं और कहीं मां,

ठोर ठिकाना,

तेरे चरणों में आया हूं,

अपना ले मां चरणों में तेरे,

दाखिल अर्जी करदी,

बहुत सताया हूं दुनिया ने,

है दुनिया बड़ी बेदर्दी,

दर्द के मारो का कहां,

और ठिकाना,

इस आस में आया हूं,

आन पड़ा हूं ठोकर में मां,

दुनिया का ठुकराया हूं,

दुनिया है पैसे वालों की,

पैसे की होती जय जय कार,

सुना है खाली हाथ भी,

जो चरणों में आए,

उसे करती है तू स्वीकार,

आंखों में भर आंसू,

हृदय में श्रद्धा लाया हूं,

नहीं और कहीं मां,

ठोर ठिकाना,

तेरे चरणों में आया हूं,

आन पड़ा हूं ठोकर में मां,

दुनिया का ठुकराया हूं.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।