लिख भेजी पतिया आज रुक्मणि अर्ज करे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

लिख भेजी पतिया आज रुक्मणि अर्ज करे,

कान्हा ले जाओ आकर आज रुक्मणि याद करे,

लिख भेजी पतिया आज...

मेरे बाबुल ने एक ना मानी भैया मेरो करे मनमानी,

शिशुपाल संग करे मेरो ब्याह रुक्मणि अर्ज क,रे

कान्हा ले जाओ आकर आज रुक्मणि याद करे....

ये पतिया असुअन से लिख रही भेद जिया के सारे कह रही,

नहीं करो देर अब श्याम रुक्मणि अर्ज करे,

कान्हा ले जाओ आकर आज रुक्मणि याद करे.....

जब से देखि तेरी सूरत मन में बसा लेइ तेरी मूरत,

बस श्याम मेरे भरतार रुक्मणि अर्ज करे,

कान्हा ले जाओ आकर आज रुक्मणि याद करे.....

पतिया पढ़ के जल्दी अइयो पकड़ हाथ मोहे लेके जइयो,

मैं देखु तेरी बाट रुक्मणि अर्ज करे,

कान्हा ले जाओ आकर आज रुक्मणि याद करे.....

मेरे श्याम तुम्हे वही मिलूंगी कर सोलह शृंगार चलूंगी,

मैं पुजू गोरी माय रुक्मणि अर्ज करे,

कान्हा ले जाओ आकर आज रुक्मणि याद करे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।