देवी भवानी हनुमान मैं मानूंगी

पारंपरिक
हनुमान जी भजन दुर्गा भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

देवी भवानी हनुमान मैं मानूंगी....

कहां से आवे मेरी देवी भवानी,

तो कहां से आवे हनुमान मैं मानूंगी,

देवी भवानी हनुमान मैं मानूंगी....

पहाड़ों से आवे मेरी देवी भवानी,

सालासर से आवे हनुमान में मानूंगी,

देवी भवानी हनुमान मैं मानूंगी....

काहे पर आवे मेरी देवी भवानी,

काहे पर आवे हनुमान में मानूंगी,

देवी भवानी हनुमान मैं मानूंगी....

शेरों पर आवे मेरी देवी भवानी,

हवा में आवे हनुमान में मानूंगी,

देवी भवानी हनुमान मैं मानूंगी....

कहा तो खावे मेरी देवी भवानी,

कहा तो खावे हनुमान मैं मानूंगी,

देवी भवानी हनुमान मैं मानूंगी....

सब रस मेवा खावे देवी भवानी,

चूरमे का भोग हनुमान मैं मानूंगी,

देवी भवानी हनुमान मैं मानूंगी....

कहां तो पहरे मेरी देवी भवानी,

कहां तो पहरे हनुमान मैं मानूंगी,

देवी भवानी हनुमान मैं मानूंगी....

लाल चुनरिया ओढ़े देवी भवानी,

लाल लंगोटा हनुमान मैं मानूंगी,

देवी भवानी हनुमान मैं मानूंगी....

क्या कुछ देमें मेरी देवी भवानी,

कहा तो देमें हनुमान मैं मानूंगी,

देवी भवानी हनुमान मैं मानूंगी....

खाली झोली भर्ती मेरी देवी भवानी,

तो संकट काटे हनुमान मैं मानूंगी,

देवी भवानी हनुमान मैं मानूंगी....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।