ओ बाबोसा चूरूवाले अब तो गले लगाले

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - ओ दुनिया के रखवाले

भगवान ... भगवान... भगवान.....भगवान

ओ बाबोसा चुरू वाले, मेरा जीवन तेरे हवाले,

मुझे अब तो गले लगाले,

जीवन की इस राह में मैने, हरपल ठोकर खाई,

गेरो की क्या बात करूँ में अपनो ने पीट दिखाई,

हुई जग में मेरी हंसाई,

हो.. हो.. मिट रही है मेरी हस्ती,

अब तो आके बचाले.. अब तो आके बचाले,

हो.. हो.. अब तो आके बचाले,

हो.. भक्तो के रखवाले,

ओ बाबोसा चुरू वाले...

टूट गई सारी आशाये, छाया है गम का अंधेरा,

ओझल हुई खुशियाँ आंखों से डाला है दुख ने डेरा,

चहु ओर से मुझको घेरा,

हो.. हो.. भटक भटक के हार गया मैं,

पांवो में पड़ गये छाले,

हो.. अब तो गले लगाले....

झूठे है सब रिस्ते नाते, यहां न कोई नही है मेरा,

माँ छगनी के राजदुलारे, एक सहारा तेरा,

जन्मों का काटो फेरा,

हो..हो .. मुझको तेरी आस लगी है,

अब तो तू ही संभाले, हो जीवन देने वाले,

हो.. अब तो गले लगाले....

धन ओर दौलत, शोहरत इज्जत, मागु न कोई खजाना,

मेरे दिल की एक तमन्ना, चरणों मे दे दो ठिकाना,

इतना वर बाबा देना,

हो... दिलबर देव को अपना बनाकर,

अपने दिल मे छुपाले,

ओ बाबोसा चुरू वाले, मेरा जीवन तेरे हवाले,

मुझे अब तो गले लगाले,

ओ बाबोसा चुरूवाले....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।