कइसन अशुभ अमंगल भेष बा तोहार दुलहा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कइसन अशुभ अमंगल भेष बा तोहार दुलहा,

कइसे परिछीं हम तोह के गँवार दुलहा,

सिर पर जटा हाथ तिरशूल,

बदन में असमशान के धूल,

गले नगवा करेला फुफकार दुलहा,

कइसे परिछीं हम....

नन्दी भृंगी साथ विराजत,

संग में भुत बैताल बा नाचत,

नाचत घुटने पर देइ देइ के ताल दुलहा,

कइसे परिछीं हम.....

अइसन बर के गौरा न देहब,

चाहे जहर खाई हम लेहब,

भले गौरा रहिहें कुआँर दुलहा,

कइसे परिछीं हम.....

नारद के हम काइ बिगड़नी,

कइलन हमसे अइसन करनी,

नारद गौरा के खोजलें बउराह दुलहा,

कइसे परिछीं हम......

सुनि के सास बचन त्रिपुरारी,

धइलन सुंदर रूप सवाँरी,

तोहार महिमा बा अगम अपार दुलहा,

तोहार अशुभ भेष भी मंगल के भंडार दुलहा,

चल परिछीं हम तोहके लबार दुलहा,

चल परिछीं हम.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।