जीने का रास्ता ये एक वंशी सिखाती है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जीने का रास्ता ये एक वंशी सिखाती है,

छेद है सीने में फिर भी गुनगुनाती है....

ऐसे मोहन ने नहीं अधरों पे संवारा,

राज इसमें लाख हैं जाने ना जग सारा,

बोझ ग़म का सीने पे अपने उठाती है,

छेद है सीने में फिर भी गुनगुनाती है.....

मुस्कुरा कर प्यार इससे करता है कान्हा,

जानता है इसके दिल का क्यूंकि फ़साना,

राधे रानी ये समझ पल भर ना पाती है,

छेद है सीने में फिर भी गुनगुनाती है......

इसकी ये आदत से मोहन मुंह नहीं मोड़े,

छोड़ता दुनिया को पर वंशी नहीं छोड़े,

बेधड़क पल भर नहीं ये हिचकिचाती है,

छेद है सीने में फिर भी गुनगुनाती है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।