भोलेनाथ से प्यार

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जबसे तूने थमा है बाबा मेरा हाथ,

दुनिया अब दिखती नही सब दीखते भोलेनाथ,

मुझको तुझपे सबसे ज्यादा ऐतबार हो गया……..

भोलेनाथ पता नहीं तुझसे प्यार कब कब हो गया,

भोलेनाथ पता नहीं तुझसे प्यार कब कब हो गया……

आपकी तारीफ में कोई शब्द मेरे पास नहीं,

आपके शिवा दुनिया में अब कोई मेरा ख़ास नहीं,

तेरे चरणो में रे बाबा सबेरे से दिन ढल गया,

तेरी भक्ति में है सारा मोह मेरा सो गया……

भोलेनाथ पता नहीं तुझसे प्यार कब कब हो गया,

भोलेनाथ पता नहीं तुझसे प्यार कब कब हो गया…..

ओझल करके तू मुझे भोले यु बाहो में लपेट ले,

करुणा की वो हर महिमा दे मुझको खुदमे मुझको समेट ले……..

भोले…. ए….

तुझसे ना बड़ा कोई ग्यानी है ना मुझसे बड़ा कोई अज्ञानी है,

ज्ञान की मुझको रौशनी दे इतनी सी दृष्टि तू सौप दे……..

तेरी बदौलत बेशुरा सुर्र राग में है ढल गया,

तेरे ही प्रेम और भक्ति में मेरा नामो निशाँ हो गया,

भोलेनाथ पता नहीं तुझसे प्यार कब कब हो गया,

भोलेनाथ पता नहीं तुझसे प्यार कब कब हो गया……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।