मुँह फेर जिधर देखु

अलका गोएल
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मुँह फेर जिधर देखु मुझे तू ही नज़र आये

हम छोड़के दर तेरा अब और किधर जाये

मुरलीवाला नज़र आये मेरा प्यारा नाज़र आये

गैरो ने ठुकराया अपने भी बदल गये है

हम साथ चले जिनके वो दूर निकल गये है

तेरे ही करम पर हूँ , तू बकश या ठुकराये

मुँह फेर जिधर......

माना के मैं पापी हूँ मुझे खबर गुनायो की

बस इतनी सजा देना मुझे मेरे गुनायो की

तेरे दर हो सर मेरा , और साँस में तू आये

मुँह फेर जिधर.....

हम ख़ाख़ नशीनो की क्या खूब तमना है

तेरे नाम पे जीना है तेरे नाम पे मरना है

मरना है तो तेरी , चोखट पे ही मर जाये

मुँह फेर जिधर.....

बोल बांके बिहारी लाल की जय

जय जय श्री राधे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।