मनवा सतगुरु सेवा कीजे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन गुरुदेव भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मनवा सतगुरु सेवा कीजे, लीजे भली बुरी पहचान,

मनवा सतगुरु सेवा कीजे, लीजे भली बुरी पहचान....

भवसागर की भूल भुलैया, भटक रह्यो अनजान,

सतगुरु साँची राह दिखासी, देसी अमृत ज्ञान,

मनवा सतगुरु सेवा कीजे, लीजे भली बुरी पहचान....

गुरु सम देव नहीं कोई दूजा, गुरु बिना मिले ना ज्ञान,

गुरु गोविन्द का दरश करादे, नहीं कोई गुरु समान,

मनवा सतगुरु सेवा कीजे, लीजे भली बुरी पहचान....

गुरु पद पावन पंकज राज से, मिटे मोह अज्ञान,

'रामावतार' शरण सतगुरु की, कर जीवन कल्याण,

मनवा सतगुरु सेवा कीजे, लीजे भली बुरी पहचान....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।