झूल रहे तीन देव बन कर के लालना

पारंपरिक
महादेव भजन विविध भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

माता अनुसूइया ने डाल दिया पालना,

झूल रहे तीन देव बन कर के लालना....

सारी खुशी के फूली ना समाती,

गोदी में लेती कभी पलना झूलाती,

आज मेरे भाग्य की कौन करे सराहना,

झूल रहे तीन देव बन कर के लालना,

माता अनुसूया ने....

बालक की भांति प्रभु रुदन मचावे,

ब्रह्मा और भोले सग यू बतलामें,

लेने आए धेद यहां गली नहीं दाल ना,

झूल रहे तीन देव बन कर के लालना,

माता अनसूइया ने....

मेरे घर आए मुझे देने बढ़ाई,

भूल गए आज अपनी सारी चतुराई,

भारत की देवियों से आज हुआ सामना,

झूल रहे तीन देव बन कर के लालना,

माता अनुसूइयाने.....

कोई गरुण पाल कोई सृष्टि के रचैया,

कोई बैठे नादिया पर डमरू के बजैया,

ऐसे फसे तीन देव पूछे कोई हाल ना,

झूल रहे तीन देव बन कर के लालना,

माता अनुसूइया ने.....

तीन देवी दुखी होकर कुटिया पधारी,

माता हमें पति दे दो विनती हमारी,

तीन पुत्र तीन वधू आय मेरे अंगना,

झूल रहे तीन देव बन कर के लालना,

माता अनुसूइया ने.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।