हर ख़ुशी मिलती मुझे खाटू आ जाने से

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

फूलों में नज़ारों में ना यारों के महफ़िल सजाने से,

जो ख़ुशी मिलती मुझे खाटू आ जाने से,

खाटू आ जाने से श्याम दरस पाने से....

जबसे देखी है रौनक तेरे दरबार की,

फीकी फीकी लगती मुझको रंगत हर त्यौहार की,

होली के रंगो से ना दिवाली के दीपक जलाने से,

जो ख़ुशी मिलती मुझे खाटू आ जाने से,

खाटू आ जाने से श्याम दरस पाने से....

तेरे भजनो का जादू ऐसे सिर चढ़ गया,

और कहीं अब दिल नहीं लगता जब से दिल यहाँ लग गया,

गीतों से ना ग़ज़लों से ना सरगम से ना किसी तराने से,

जो ख़ुशी मिलती मुझे खाटू आ जाने से,

खाटू आ जाने से श्याम दरस पाने से.....

तेरी महिमा का वर्णन सोनू अब आम है,

तेरी बातें तेरी चर्चा हर घडी ये काम है,

किस्सों से कहानी से ना यादों से ना किसी फ़साने से,

जो ख़ुशी मिलती मुझे खाटू आ जाने से,

खाटू आ जाने से श्याम दरस पाने से......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।