नौ देवी की जल रही ज्योत

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

नौ देवी की जल रही ज्योत बेगी आजा भजना में,

मैया रानी की जल रही ज्योत बेगी आजा भजना में,

अम्बे मैया की जल रही ज्योत बेगी आजा भजना में,

दुर्गा मैया की जल रही ज्योत बेगी आजा भजना में,

भजना में भक्तो भजना में भजना में रे सखियों भजना में,

मैया रानी की जल रही ज्योत बेगी आजा भजना में.....

शीश मैया के टीका सोहे नाक मैया के नथनी,

माँ की बिंदिया लगा दे आज बेगी आजा भजना में,

मैया रानी की जल रही ज्योत बेगी आजा भजना में.....

कान मैया के झुमका सोहे गले मैया के हरवा,

माँ को माला पहना दे आज बेगी आजा भजना में,

देवी मैया की जल रही ज्योत बेगी आजा भजना में,

मातारानी की जल रही ज्योत बेगी आजा भजना में....

हाथ मैया के चुड़ा सोहे कमर मैया के तगड़ी,

माँ के मेहँदी लगा दे आज बेगी आजा भजना में,

मैया रानी की जल रही ज्योत बेगी आजा भजना में.....

पैर मैया के पायल सोहे ऊँगली मैया के बिछुआ,

माँ के महावर लगा दे आज बेगी आजा भजना में,

मैया रानी की जल रही ज्योत बेगी आजा भजना में.....

कमर मैया के लहंगा सोहे अंग मैया के चोली,

माँ के चुनर ओढ़ादे आज बेगी आजा भजना में,

मैया रानी की जल रही ज्योत बेगी आजा भजना में.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।