होली खेलन आजा रे मोहन

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

होली खेलन आजा रे मोहन लेके पिचकारी खड़ी,

लेके पिचकारी खड़ी रे मेरे मोहन लेके पिचकारी खड़ी,

होली खेलन आजा रे मोहन लेके पिचकारी खड़ी....

टोली आई मस्ती छाई सारी गोपिया घर से आयी,

रंग गुलाल लेके आजा रे मोहन लेके पिचकारी खड़ी,

होली खेलन आजा रे मोहन लेके पिचकारी खड़ी....

ढोल मंजीरा चंग बजावे कान्हा नाचे गोपिया नचावे,

मुरली बजाता आजा रे मोहन लेके पिचकारी खड़ी,

होली खेलन आजा रे मोहन लेके पिचकारी खड़ी....

राधा जी गुलाल मले श्याम जी के मुख पर,

मारी पिचकारी कान्हा रंग भर भर कर,

लाल गुलाबी हुए आज रे मोहन लेके पिचकारी खड़ी,

होली खेलन आजा रे मोहन लेके पिचकारी खड़ी....

भक्तो के हाथों रंग का कटोरा,

राधे और कन्हैया के प्रेम का जोड़ा,

पकड़ लियो है आज रे मोहन लेके पिचकारी खड़ी,

बांध लियो है आज रे मोहन लेके पिचकारी खड़ी,

होली खेलन आजा रे मोहन लेके पिचकारी खड़ी....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।