पर्वत पे उड़े रे गुलाल होली खेले लांगुरिया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पर्वत पे उड़े रे गुलाल होली खेले लांगुरिया,

लांगुरिया रे खेले लांगुरिया,

पर्वत पे उड़े रे गुलाल होली खेले लांगुरिया.....

लेके पिचकारी लांगुर मंदिरिया में पहुंचो,

माँ की रखड़ी ओहो,

माँ की रखड़ी दई है भिगोय होली खेले लांगुरिया,

माँ की बिंदिया दई है भिगोय होली खेले लांगुरिया....

लेके पिचकारी लांगुर मंदिरिया में पहुंचो,

माँ के झुमका ओहो,

माँ के झुमका दई है भिगोय होली खेले लांगुरिया,

माँ की नथनी दई है भिगोय होली खेले लांगुरिया.....

लेके पिचकारी लांगुर मंदिरिया में पहुंचो,

माँ का हरवा ओहो,

माँ का हरवा दई है भिगोय होली खेले लांगुरिया,

माँ का चुड़ला दई है भिगोय होली खेले लांगुरिया.....

लेके पिचकारी लांगुर मंदिरिया में पहुंचो,

माँ की तगड़ी ओहो,

माँ की तगड़ी दई है भिगोय होली खेले लांगुरिया,

माँ की पायल दई है भिगोय होली खेले लांगुरिया,

माँ के बिछुआ दई है भिगोय होली खेले लांगुरिया....

लेके पिचकारी लांगुर मंदिरिया में पहुंचो,

माँ का लहँगा ओहो,

माँ का लहँगा दई है भिगोय होली खेले लांगुरिया,

माँ की चुनरी दई है भिगोय होली खेले लांगुरिया.....

बैठी बैठी मैया मंदिर में मुस्कावे,

हनुमत और भैरु के साथ होली खेले लांगुरिया.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।