मैया दिल में धीरज बांधो मोहे कछु ना होयगो

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विष्णु भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

मैया दिल में धीरज बांधो मोहे कछु ना होवेगो,

कछु ना होवेगो मोहे कछु ना होवेगो,

मैया दिल में धीरज बांधो मोहे कछु ना होवेगो.....

जब से मैया मैने जन्म लियो है,

हरी नाम को जाप कियो है,

मैया मैने कियो हरी को ध्यान मोहे कछु ना होवेगो,

कछु ना होवेगो मोहे कछु ना होवेगो,

मैया दिल में धीरज बांधो मोहे कछु ना होवेगो.....

जब मैया मै तीन बरस को,

गुरु बनायो नारद मुनि को,

मैया मै लियो गुरु से ज्ञान मोहे कछु ना होवेगो,

कछु ना होवेगो मोहे कछु ना होवेगो,

मैया दिल में धीरज बांधो मोहे कछु ना होवेगो....

जब मैया मै पांच बरस का,

पिता मेरे ने पहाड़ से फेका,

मैया मोहे हरी ने लियो बचाये मोहे कछु ना होवेगो,

कछु ना होवेगो मोहे कछु ना होवेगो,

मैया दिल में धीरज बांधो मोहे कछु ना होवेगो....

लेलो पिताजी नाम हरी का,

तुम तर जाओगे,

पाप कर्म से मुक्ति पाकर बैकुंठ जाओगे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।