होली खेले भोलेनाथ

पारंपरिक
श्री गणेश भजन शिव भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

होली खेले भोलेनाथ आयो फागन महीना रे,

हाँ रे होली खेले भोलेनाथ आयो फागन महीना रे,

हाँ हाँ रे होली खेले रे सांचाई रे होली खेले,

भोलेनाथ आयो फागन महीना रे....

भर भर रंग गुलाल होली शंकर जी भी खेले रे,

तो डमरू की ताल पे हाँ डमरू की ताल पे,

गौरा जी नाचे रे, होली खेले रे,

होली खेले भोलेनाथ आयो फागन महीना रे.....

गौरा जी को देख देख गणपति जी को मन हर्षावे रे,

भोले जी को देख देख गणपति को मन हर्षावे रे,

तो झांझ मंजीरा लेकर रिद्धि सिद्धि नाचे रे होली खेले रे,

होली खेले भोलेनाथ आयो फागन महीना रे.....

बैठ मोर पे कार्तिक रंग गुलाल उड़ावे रे,

तो नंदी और मूषक के संग में गण भी नाचे रे होली खेले रे,

होली खेले भोलेनाथ आयो फागन महीना रे.....

भर भर केसर की पिचकारी भोले जी ने मारी रे,

तो फागुन की मस्ती भीगे दुनिया सारी रे होली खेले रे,

होली खेले भोलेनाथ आयो फागन महीना रे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।