तेरा नगरकोट स्थान ज्वाला महारानी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरा नगरकोट स्थान ज्वाला महारानी,

मैं तो धरू तुम्हारा ध्यान ज्वाला महारानी.....

तोहै सुमिरो शारदा माई,

मेरे ह्रदय बीच समय,

सतगुरु ने राह दिखाई,

तेरे चरण पढ़ो महामाई,

मुझे अभय मिला वरदान ज्वाला महारानी,

तेरा नगरकोट स्थान....

तुमरे हाथों में हरी पीली चूड़ियां,

तुमरे पांव में बजनी पायलिया,

तुमरे दसों उगरियन मुद्री,

मैया लाल रंग ओढ़े चुनरी,

तुम्हारे गले नौलखा हार ज्वाला महारानी,

तेरा नगरकोट स्थान....

पांचो पांडव भवन बनाया,

अर्जुन ने चवर ढूरायो,

अकबर ने छतर चढ़ाया,

ध्यानु ने शीश चढ़ाया,

तेरी ज्योत रही लहराए ज्वाला महारानी,

तेरा नगरकोट स्थान....

मैया बन बन फिरे अकेली,

तुमरे संग ना संग की सहेली,

तुमरे हाथ में खप्पर सोंहै,

तुमरे हाथ में खड़क बिराजे,

मैया गण में करें घमासान ज्वाला महारानी,

तेरा नगरकोट स्थान....

बन बन में रचे उपई,

पर्वत पर कुइया खुदाई,

जामें निकलो निर्मल पानी,

मैया धन-धन आदि भवानी,

तेरा लांगुर करें स्नान ज्वाला महारानी,

तेरा नगरकोट स्थान....

तेरी कैसे महिमा गाऊं,

और किस बीद तुम्हें मनाऊं,

तेरा सुमर सुमर यश गांऊ,

तेरे चरण छोड़ कहां जाऊं,

मैया मैं बालक नादान ज्वाला महारानी,

तेरा नगरकोट स्थान....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।