जीवन तो भैया एक रेल है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जीवन तो भैया एक रेल है,

कभी पेसेंजर कभी मैल है,

जीवन तो भैया एक रेल हैं,

कभी पेसेंजर कभी मैल है।।

सुख दुख की पटरी पे दौड़ लगाती है,

सुख दुख की पटरी पे दौड़ लगाती है,

मंज़िल तक हमको पहुचाती है,

मंज़िल तक हमको पहुचाती है,

सांसो का इसमे जब तक तेल है,

सांसो का इसमे जब तक तेल है,

कभी पेसेंजर कभी मैल है,

जीवन तो भैया एक रेल हैं,

कभी पेसेंजर कभी मैल है।।

अच्छे कर्मो की टिकट कटा लेना,

अच्छे कर्मो की टिकट कटा लेना,

पूछे तो टीटी दिखला देना,

पूछे तो टीटी दिखला देना,

बिना टिकट तो सीधी जैल है,

बिना टिकट तो सीधी जैल है,

कभी पस्संगेर कभी मैल है

कभी पेसेंजर कभी मैल है,

जीवन तो भैया एक रेल हैं,

कभी पेसेंजर कभी मैल है।।

रिश्ते भी बनते और बिगड़ते है,

रिश्ते भी बनते और बिगड़ते है,

यात्री जो चढ़ते और उतरते है,

यात्री जो चढ़ते और उतरते है,

मैय्या के सिग्नल का ये खेल है,

मैय्या के सिग्नल का ये खेल है,

कभी पेसेंजर कभी मैल है,

जीवन तो भैया एक रेल हैं,

कभी पेसेंजर कभी मैल है।।

जीवन तो भैया एक रेल है,

कभी पेसेंजर कभी मैल है,

जीवन तो भैया एक रेल हैं,

कभी पेसेंजर कभी मैल है।।

" Manjeet singh "

Pad player= 9887203444

Form, Ajmer rajsthan

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।